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उद्देश्य Last Updated Date : 03 Feb 2015

संस्थान के प्रमुख उद्देश्य निम्नानुसार हैं –

  1. समाज रक्षा के क्षेत्र में नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करना;
  2. समाज रक्षा की समस्याओं का अनुमान लगाना और इनका निदान करना;
  3. समाज रक्षा के क्षेत्र में निवारक, नैदानिक और पुनर्वास नीतियों का विकास;
  4. समाज रक्षा नीतियों के उद्देश्यों को साकार करने के साधनों की पहचान करना तथा विकास करना;
  5. समाज रक्षा नीतियों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा और मूल्यांकन करना;
  6. समाज रक्षा में स्वैच्छिक प्रयासों को बढ़ावा देना तथा उनका विकास करना;

उपर्युक्त उद्देश्यों को साकार करने के लिए संस्थान निम्नलिखित कार्यकलाप करता है :- 

  1. समाज रक्षा मुद्दों पर अनुसंधान;
  2. समाज रक्षा के क्षेत्रों में सांख्यिकी का संकलन और विश्लेषण;
  3. समाज रक्षा के क्षेत्र में कार्यकलापों विकास करना, बढ़ावा देना, प्रायोजित करना तथा प्रशिक्षण/ओरियन्टेशन आयोजित करना;
  4. समाज रक्षा समस्याओं के संबंध में केन्द्र और राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को सलाह देना तथा समाज रक्षा के क्षेत्र में माडल नियमों और विनियमों को तैयार करने के लिए तकनीकी इनपुट प्रदान करना;
  5. राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों तथा स्वैच्छिक संगठनों के बीच समाज रक्षा के संबंध में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करना और इस प्रकार समाज रक्षा के क्षेत्र में सूचनाओं के लिए एक क्लियरिंग हाउस के रूप में कार्य करना;
  6. विशेषकर समुदाय के निवारक और पुनर्वास संबंधी भूमिका के संदर्भ में समाज रक्षा समस्याओं के संबंध में जन जागरूकता पैदा करना;
  7. अन्य देशों के साथ उनके विशिष्ट एजेंसियों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ समाज रक्षा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए भारत सरकार की सहायता करना;
  8. समाज रक्षा के संबंध में सम्मेलन/सेमिनार/कार्यशालाएं आयोजित करना;
  9. समाज रक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थाओं और स्वैच्छिक संगठनों के साथ तालमेल बिठाना; और
  10. समाज रक्षा के क्षेत्र में लोकप्रिय और व्यावसायिक दोनों प्रकार के प्रकाशन करना।

चिंता के क्षेत्र

  1. मादक द्रव्य दुरुपयोग निवारण
  2. वृद्ध व्यक्तियों की देखभाल करना; और
  3. भिक्षावृत्ति निवारण, बाल संरक्षण आदि सहित अन्य समाज रक्षा मुद्दे।

लक्षित समूह

संस्थान के लक्षित समूह हैं :-

  1. केन्द्र और राज्य सरकारों के संबंधित विभागों के पदाधिकारी
  2. स्वैच्छिक क्षेत्र और सरकारी दोनों क्षेत्रों में समाज रक्षा के क्षेत्र में सेवा प्रदाता/देखभाल करने वाले लोग;
  3. सामाजिक कार्य स्कूलों और संबंधित अकादमिक संस्थानों के शिक्षकों और पेशेवर व्यक्ति।