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सामाजिक रक्षा Last Updated Date : 03 Feb 2015

जैसा कि सामान्य भाषा-शैली में समझा जाता है समाज रक्षा कुछेक अधिकारहीन जनसंख्या समूह से संबंधित है जिनको सरकार और सिविल सोसायटी दोनों द्वारा व्यवस्थित ढंग से संगठित और अनुकूल प्रयासों के माध्यम से संरक्षण के साथ-साथ देखभाल और सहायता की आवश्यकता होती है। नशीली दवा दुरुपयोग, वृद्धावस्था, बाल शोषण, भिक्षावृत्ति, एचआईवी/एड्स, मानव तस्करी परख सेवाएं, कारागार, ट्रांसजेंडर आदि जैसे समाज रक्षा मुद्दों को उभरती हुई समस्या के रूप में माना गया है। अत: समाज के इस अधिकारहीन वर्ग की भलाई महत्वपूर्ण है और इसके लिए तत्काल और उपयुक्त हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

भिक्षावृत्ति भारत में गंभीर समस्या है जिसका समाधान प्राथमिकता आधार पर किए जाने की आवश्यकता है। खानाबदोसी और भिक्षावृत्ति के विरुद्ध बने कानून ऐसे लोगों पर नियंत्रण करने का एक साधन हैं, जो समाज के लिए संभावित खतरे और परेशानी का कारण बनते हैं। तथापि, यह समस्या सामाजिक मुद्दे से कहीं बढ़कर है और इसका प्रबंध तदनुसार किए जाने की आवश्यकता है। भिक्षावृत्ति निवारण के संबंध में संबंधित राज्य के अधिकारियों और एनजीओ भागीदारों के लिए क्रमबद्ध प्रशिक्षण/सुग्राहीकरण इस सामाजिक बुराई को जड़ से उखाड़ने में पूरी सहायता करेगी।

ट्रांसजेंडर समुदाय एक अन्य संवेदनशील और अधिकारहीन समूह है जिनके लिए भोजन, कपड़ा, आश्रय स्थल, शिक्षा और स्वास्थ्य तथा रोजगार जैसे मूलभूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। हमारे मंत्रालय ने इन समूहों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए विकास कार्यों की शुरूआत की है। ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याएं बहुआयामी हैं और इसलिए इस मुद्दे को हैण्डल करने के लिए बहुस्तरीय कार्यनीति की आवश्यकता है। विभिन्न व्यापार पहलुओं के संबंध में इस समुदाय के लोगों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम से उनको रोजगार दिलाने और स्व-रोजगार में सहायता मिलेगी।

यह प्रभाग नशीली दवा दुरुपयोग से प्रभावित बच्चों की समाज रक्षा के क्षेत्र में संबंधित मामलों, समाज रक्षा के क्षेत्र में स्टेकधारकों को परामर्श कौशल दिए जाने से संबंधित मामले की भी निगरानी करता है। प्रभाग अपने व्यापक राष्ट्र स्तरीय एक माह के कार्यक्रम तथा राज्य स्तर पर 3 दिन के अल्पावधिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज रक्षा के मुद्दों पर सरकारी/एनजीओ/पंचायत/पुलिस पदाधिकारियों तथा समाज कार्य विशेषज्ञों को प्रशिक्षित/सुग्राहीकृत करता है।

इस प्रभाग का प्रमुख उद्देश्य स्टेकधारकों/सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण देने के लिए भिक्षावृत्ति निवारण, ट्रांसजेंडर समुदाय तथा बाल सरंक्षण आदि के क्षेत्र में कार्य कर रहे राज्य समाज कल्याण विभागों तथा संस्थाओं के साथ एक संबंध स्थापित करना है।

इस प्रभाग के लक्षित समूह संबंधित राज्य समाज कल्याण विभाग के अधिकारी, राज्य पुलिस विभागों के परख अधिकारी मध्य स्तर के पदाधिकारी, समाज कार्य संस्थाओं के प्रवक्ता, रीडर और क्षेत्र कार्य पर्यवेक्षक, संबंधित एनजीओ के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, पंचायत पदाधिकारी और शोध विद्यार्थी हैं।

निम्नलिखित प्रशिक्षण और क्षमता वर्धन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं :-

  • सरकारी/एनजीओ और पंचायत पदाधिकारियों के लिए समाज रक्षा मुद्दे पर विस्तृत एक माह का सर्टिफिकेट कोर्स आयोजित किया जाता है।
  • समाज रक्षा मामले पर सरकारी/एनजीओ/पंचायत पदाधिकारियों के लिए 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • समाज रक्षा मामले पर पुलिस विभाग के पदाधिकारियों के लिए 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • समाज रक्षा मामले पर सामाजिक कार्य विशेषज्ञों के लिए 3 दिवसीय क्षेत्रीय स्तर का प्रशिक्षण।
  • नशीली दवा दुरुपयोग से प्रभावित बच्चों की विशेष देखभाल के लिए संबंधित सरकारी/एनजीओ पदाधिकारियों के लिए 3 दिवसीय कार्यक्रम।
  • समाज रक्षा के क्षेत्र में स्टेकधारकों के लिए परामर्श कौशल के संबंध में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • राष्ट्रीय स्तर पर सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।
  • भिक्षावृत्ति और ट्रांसजेंडर समुदाय के संबंध में उप समूह और विशेष बैठकें आयोजित की जाती हैं।