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प्रशासन और योजना Last Updated Date : 03 Feb 2015

संगठन और प्रबंधन

संस्थान के सहज कार्यकरण को सुविधाजनक बनाने तथा एक सौहार्द्रपूर्ण कार्य का वातावरण तैयार करने के लिए संस्थान में संगठन और प्रबंधन के संबंध में एक बहुस्तरीय सहायक संरचना है। 

सामान्य परिषद (जीसी) संस्थान का शीर्ष शासी निकाय है और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव इसके पदेन अध्यक्ष हैं।  सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के आदेश सं.15-4(6)/-07-08-एजी-।। दिनांक 26.03.2008 के तहत संस्थान के सामान्य परिषद का दो वर्षों की अवधि के लिए पुनर्गठन किया गया था। संस्थान के संगम ज्ञापन के अनुसार सामान्य परिषद की बैठक वर्ष में कम से कम एक बार आयोजित करने का प्रस्ताव है।

हालांकि, सामान्य परिषद व्यापक और अनिवार्य नीतिगत पैरामीटरों का निर्धारण करती है,  संस्थान की कार्यकारी परिषद संस्थान के कार्यकलापों और कार्यक्रमों की निगरानी और मार्गनिर्देश देती है।  कार्यकारी परिषद की अध्यक्षता सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव (समाज रक्षा) द्वारा की जाती है। संस्थान के कार्यकारी परिषद का पुनर्गठन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के आदेश सं.15-4(6)/-07-08-एजी-II दिनांक 26.03.2008 द्वारा दो वर्षों की अवधि के लिए किया गया था। संस्थान के संगम ज्ञापन के अनुसार, कार्यकारी परिषद की बैठक प्रत्येक तिमाही में कम से कम एक बार आयोजित किया जाना अपेक्षित है। 

संस्थान अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम और अनुसंधान कार्यकलाप आयोजित करता है। ऐसे कार्यकलापों को निष्पादित करने में सुविज्ञ और व्यावसायिक मार्गदर्शन सुनिश्चित करने के लिए संस्थान में एक अकादमिक समिति (एसी) है जिसकी अध्यक्षता निदेशक द्वारा की जाती है।  समाज रक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और संस्थान के संबंधित उप निदेशक इसके सदस्य हैं।

संस्थान में एक वित्त समिति (एफसी) भी है जिसकी अध्यक्षता निदेशक द्वारा की जाती है और इसके सदस्यों के रूप में संस्थान के उप निदेशक/कार्यक्रम प्रभाग के प्रतिनिधि तथा लेखाकार हैं। वित्त समिति सामानों के प्रापण तथा किराए पर सेवाएं लेने के लिए प्रस्तुत प्रस्तावों की जांच और सिफारिश करती है।

पुस्तकालय समिति (एलसी) की अध्यक्षता निदेशक करते हैं जिसके सदस्य प्रभाग प्रमुख तथा पुस्तकालय सहायक हैं। समिति पुस्तकालय के कार्यकलापों की आवधिक समीक्षा करती है तथा समय-समय पर पुस्तकों की खरीद को प्राधिकृत करती है।

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण

संस्थान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों हेतु अनिवार्य आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के अनुदेशों का अनुपालन कर रहा है।

राजभाषा नीति का क्रियान्वयन

संस्थान के कार्यकरण में राजभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने की दृष्टि से संस्थान ने संस्थान के निदेशक की अध्यक्षता में राजभाषा कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया है।

'हिन्दी पखवाड़ा' समारोह के दौरान हिन्दी टंकण, टिप्पण और आलेखन, कविता आदि की स्पर्धाओं सहित अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं और श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी को नकद पुरस्कार दिया जाता है।

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का कार्यान्वयन

यह संस्थान अक्तूबर, 2005 से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का क्रियान्वयन कर रहा है। उप निदेशक, (समाज रक्षा) संस्थान के केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी हैं तथा निदेशक अपीलीय प्राधिकारी हैं। 

निधियां

संस्थान को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी सहायता अनुदान के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।

एनआईएसडी भवन की स्थिति:

द्वारका में संस्थान के भवन का निर्माण- यह संस्थान अपनी शुरूआत से वेस्ट ब्लॉक-।, आर. के. पुरम, नई दिल्ली स्थित कार्यालय से कार्य कर रहा है। दिल्ली विकास प्राधिकरण ने संस्थान के संस्थागत भवन निर्माण और हॉस्टल सुविधाओं के लिए द्वारका सेक्टर-10 में 2 एकड़ भूमि आवंटित की है। दिल्ली मैट्रो रेल कॉरपोरेशन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त कर लिया है। तद्नुसार सीपीडब्ल्यूडी ने भवन योजना तथा निर्माण की अनुमानित लागत डीडीए के समक्ष प्रस्तुत किया है। दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन ने आवश्यक अनुमोदन दे दिया है तथा दिल्ली के मुख्य फायर सर्विस अधिकारी कार्यालय से भी भवन की ड्राइंग का अनुमोदन मिल चुका है। अब तक इस संबंध में सभी आवश्यक मंजूरी और अनुमोदन प्राप्त हो चुके हैं तथा एनआईएसडी भवन ड्राईंग योजना के संबंध में डीडीए का अनुमोदन प्राप्त किया जा रहा है। सीपीडब्ल्यूडी से नवम्बर, 2014 में एनआईएसडी भवन के शीघ्र निर्माण हेतु अंतिम लागत अनुमान प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।